लेखक-परिचय 

सार्जेंट उदय प्रकाश ( Sgt  Udai Prakash) भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त एक अनुशासित पूर्व सैनिक और समर्पित साहित्यकार हैं। मूलतः बिहार के मधुबनी जिले के रामपुर के निवासी उदय प्रकाशजी और प्रारंभिक शिक्षा प्रदेश के विभिन्न अंचलों में संपन्न हुई। घर के साहित्यिक वातावरण और बचपन में ‘चंपक’, ‘नंदन’, ‘बालक’,’ पराग’, ‘धर्मयुग', तथा 'कादम्बनी' जैसी पत्रिकाओं व कालजयी लेखकों के सान्निध्य ने आपकी लेखनी को बचपन से ही प्रखर बनाया।

मात्र 13 वर्ष की आयु में आपकी पहली कहानी 'पराग' पत्रिका में प्रकाशित हुई, जिसके उपरांत 'विज्ञान-प्रगति', 'अच्छे भैया', ‘धर्मयुग’ और ‘कादम्बनी’ जैसी पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं निरंतर स्थान पाती रहीं। वायु सेना में सेवा के दौरान आप वहाँ कि आन्तरिक साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। सेवानिवृत्ति के पश्चात आपने दिल्ली सरकार की 'मैथिली-भोजपुरी अकादमी' के लिए महत्वपूर्ण अनुवाद कार्य किए। अकादमी की पत्रिका ‘परीछन’ के प्रारम्भिक अंकों में आप के द्वारा अनुवादित साहित्यिक लेख प्रकाशित हुए हैं l

वायु सेना के कार्यकाल और तत्पश्चात भारतीय रेल व अन्य सरकारी उपक्रमों एवं कॉर्पोरेट सेक्टर के विविध अनुभवों ने आपको भारत की विविध संस्कृतियों को निकट से देखने का अवसर दिया। यही व्यापक जीवन-अनुभव आपके महाकाव्य "समुद्र-मंथन" के रूप में निस्सृत हुआ है। वर्तमान में आप दिल्ली के नरेला में निवास करते हुए निरंतर साहित्य सृजन में संलग्न हैं।